Wednesday, May 13, 2009

हाले-दिल!

ये दिन क्या आए लगे फूल हंसने देखो बसंती
बसंती.....................उफ़्फ़ खुश होने के लिए भी दिल को बस
एक छोटा सा बहाना चाहिए , आज ऐसा लगता है की हाथ फैला
कर आसमान को छु लूँ , पंख फैला कर एक नई उड़ान भर लूँ । इस दिल को और क्या चाहिए , थोडी सी ज़मीन -थोड़ा
आसमान , आज वो सब कुछ पा लिया है मैंने, पांव ज़मीन पर रुक नहीं पा रहे हैं , कैसे बयान करूं अपनी खुशी लफ्जों में, सही अल्फाज़ मिलते ही नहीं । सिर्फ़ इतना कह सकती हूँ, मैं खुश हूँ ,बहुत खुश हूँ , बहुत-बहुत खुश हूँ.......उफ्फ्फ .

6 comments:

Richa said...

Bahut pyara...padke hee I m feeling happy happy :)

nidhi said...

chalo kisi kaam to aayi meri kalam......shukriya richaji.

Richa said...

yeh richaji kya hai nidhiji...hum to dost hain to phir bas naam leke pukara karen :)

nidhi said...

sorry richa..BTW, thanx for following my blog.

zee said...

nids your hindi is as expressive as your english........and so good!

nidhi said...

Thanx janet.........appreciation from a teacher, sumthing i've craved for life long. thanx again.